बस और कुछ नहीं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps January 24, 2018 बैठे रहें यूँ ही आँखों में आँख डाले थामे इक दूजे का हाथ शिद्दत से गुज़रती रहें सदियाँ बहती रहें नदियाँ पिघलते रहें ग्लेशियर हम देह ना होकर तलाश बन जाएँ जो इक दूजे को ढूँढ क... Read more