रात्रि का तारामंडल अनंत चहुँ ओर जो खिला है बसंत दुख अब सुख में बदलने लगे काव्य भाव उमड़ने लगे हो रहा है मदिर शरीर करे वो प्रतीक्षा हो अधीर अंखियों में भरता है स्नेह कुछ लजी...
मृत्यु हादसा नहीं एक अन्य यात्रा का द्वार है अनंत उजाले की ओर इस काया से परे समस्त ताप, परितापों का त्याग अहा ! मृत्यु इस मृत्युलोक से छुटकारा दिलाती है #दुआ
देखती हूँ रोज़ नन्ही बच्चियों की रेप की खबरें कैसे कहूँ शुभ हो महिला दिवस चोरी छुपे अब भी मसली जातीं कलियाँ गर्भ में कैसे कहूँ शुभ हो महिला दिवस बस में आज भी होती है छेड़खान...
इश्क बुनना था कुछ रेशों से कुछ पलों से कुछ ख्वाब सजाने थे चाँद से सितारों से कम पड़ गए पल ,सितारे फिर बुनूँगी चदरिया झीनी उन बादलों के पार बादलों के पार खूबसूरत दुनिया होगी ...
अहा फागुन का चाँद उतर आया मन आकाश में करूँ आत्मबोध कभी आत्मशोध शाश्वत नहीं ये जीवन तो क्यूँ ना करूँ काव्य सृजन भाव-भूमि पर पुष्प खिला दूँ आ तुझे अमर बना दूँ अतीत के झरोखों ...