आज एक खत लिखा है किरण डोरी को बाँध चाँद के नाम कुछ भुरभुरे सपने लिखे हैं लिखी हैं कुछ शिकायतें सितारों की कुछ अनकही बातें लिखी हैं जलते अलाव से अहसास लिखे हैं अश्कों के नमक...
ये जो थकन है पोर - पोर में उम्र की है या यादो के बोझ की ज़िंदगी तू ही बता बोझिल हैं जो साँसें धुएँ से हैं या मन के बंधन से ज़िंदगी तू ही बता नमी सी है आँखों में याद से है या तिनके से ...
कुछ भूलना , भुलाना चाहती हूँ इस ज़िस्म से आज़ाद होना चाहती हूँ राख के ढेर में हैं चिन्गारियाँ बहुत इन्हें शोलों में बदलना चाहती हूँ जी डूब रहा मेरा शाम के साथ-साथ अब कयामत मह...
आदित्य अवसान हुआ नभ में मैं पुलक , रोमांचित हुई हिय में अति उत्सुक शशि स्वागत के लिए संध्या मादक हुई अपरिमेय तिमिर आच्छादित प्रांगण में पिय की छवि है कंगन में दीप प्रज्जव...
विगत को निहारती हूँ कुछ मादक स्मृतियाँ पाती हूँ कुछ मधुरा हैं , कुछ त्वरा हैं कुछ पुलक भरी कुछ अतिरंजित कभी राग-विराग , कभी संकुचन कभी निराशा कभी जीवन धन कभी व्याकुलता कभी आ...