जी हाँ 'भूख ' हूँ मैं मेरा नाम एक घर अनेक मैं रहती हूँ पेट की अंतड़ियों में छुपी कातर नयन , फैले हाथ में कहीं मेरा घर है लाला की तिजोरी में जो जितनी भरे खाली रहे मुझे चीन्ह सकोगे ...
आज माँ से बातें करना चाहती हूँ ढेर सारी बादलों के पार , चंदा के गाँव में जो भी लाइन मिला दे उस नेटवर्क से जुड़ना चाहती हूँ पिछले इक्कीस सालों का बिछोह सारे रंजो गम , खुशियाँ जल...