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Showing posts from July, 2019

प्रेम में अंधता

वो जो अनकहा था शायद अब अनकहा ही रहेगा वो जो पगली सी लड़की थी शायद बुद्धु ही रहेगी मन की असंख्य तहों के नीचे कहीं छुपा है कोहरा सा जो चाहत की ब्रेललिपि में लिखा है जिसे पढ़ने क...

फास्ट फूड

फास्ट फूड की लूट है लूट सके तो लूट हाय फिर कब खाएंगें , जब प्राण जाएंगें छूट बर्गर लगे है प्यारा नूडल्स पर जी ललचाए पिज्जा , पैटी बिन मोसे रहा ना जाए कहे 'दुआ' सब सुन लो जीभ होये स...

अच्छा लगता है

वो जो तुम रोते-२ोते हँस देती हो अच्छा लगता है बाते करते हुए दुपट्टे के कोने को दाँतों से काट देती हो अच्छा लगता है चाँद निहारते - निहारते खो जाती हो अच्छा लगता है मेरी शर्ट के ...

आकुलता

प्राण आकुल तन हो उठा अधीर पुनः आज मलयज समीर प्रिय स्मृति में गाए ललित गान वनिता स्मित नयन कर बैठी मान प्रेम भावना , मधुर पीड़ा धन्य मानस चित्र प्रीति अनन्य निस्तब्ध रात्रि सोए विहंग मनोभाव में उठती तरंग नित नए बाण छोड़े अनंग भटकन हृदय में तृष्णा प्रसंग दर्शन होंगे है अभिलाषा अतिरंजित उर में उमड़ी आशा शाश्वत अनुराग चिरंतन सत्य मोहमुग्ध सृष्टि , स्पंदित नित्य कांपे अधर , उन्माद निखरता सा धूमिल दृष्टि स्वप्न विहँसता सा सुख-दुख निरंतर सृष्टि लगे छलना आह! उलझे अलकें ,आतुर सपना