Posts

Showing posts from August, 2019

खुशबू की तरह

रात खामोश है मेरे दिल की तरह तेरी याद महके महुआ की तरह ज़िस्म की बात सभी करते हैं रूह को समझो फरिश्ते की तरह मैंने चाँद से तेरा पता पूछा था सर झुकाया उसने इक मुज़रिम की तरह सि...

कविता जन्म लेती है

बढ़ जाती घुटन हृदय में प्रस्फुटित होती काव्य रूप में मौन में भी बातें करे मन उगता है गीत हृदय में ख़ुद की पहचान भी हो जाए दूभर पहली बरसात की सौंधी महक कागज पर अंकित हो जाती ह...

काव्य सृजन

बिखरे क्षण समेटना चाहती हूँ हाँ काव्य सृजन करना चाहती हूँ फिसलते वो ज्यों हो रेत के कण छितरते वो ज्यों हो ओस के कण मुक्त हो जीना चाहती हूँ हाँ काव्य सृजन करना चाहती हूँ मिटत...

सुलझा लिया जाए

चलो आज रंग-बिरंगे धागों को सहेज लिया जाए उलझने हैं बहुत क्यों न सुलझा लिया जाए कश्मकश नाजुक वक्त की है बड़ी मन को ठहरा कर गहरी साँस ली जाए कौन है यहाँ जो साथ देता है उम्र भर थो...

अखबार

इन काले सफेद पन्नों के पीछे छुपे हैं कुछ भयावह सत्य जिन्हें देख , पढ़ सुन्न होती शिराएँ कराहों से भरी दर्द की स्याही से लिखी ये खबरें अलसुब्ह मेरी ड्योढ़ी पे आ जाती हैं विश...

मिसरा बना लूँ

भटकता है दिल दरवेशों की तरह मुमकिन है चाँद पर आशियाना बना लूँ ज़र्द सफ़ों पर लिखीं यादें तेरी मुमकिन है गज़ल का मिसरा बना लूँ #दुआ