मिसरा बना लूँ

भटकता है दिल दरवेशों की तरह
मुमकिन है चाँद पर आशियाना बना लूँ

ज़र्द सफ़ों पर लिखीं यादें तेरी
मुमकिन है गज़ल का मिसरा बना लूँ

#दुआ

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