सृष्टि रहस्य
सागर सम इस सृष्टि में होता लहरों का नर्त्तन
हैं मदिर , अत्यंत सुरभिमय ह्वदयंगम भाव आवर्त्तन
मुखरित हैं गीत संगीत यहाँ ,नुपूर कंकण बज रहे
प्रखर पावस में अगणित ज्योर्तिकण चमक रहे
अंधकार का अट्टहास , मुखरित है किंतु यहाँ सत्य
कण-कण में ईश्वर स्वयं , अतिसुंदरतम यह रहस्य
अनेकानेक पर्वत कंदराएँ हैं स्थान अति रमणीय
मानव को सहज सुलभ है स्वर्ग यहाँ वरणीय
किंतु दुख का विषय यही , नहीं धरा पर कोई है अभाव
फिर भी मानव ही मानव को देता है असंख्य घाव
#दुआ
Comments
Post a Comment