लम्हे

कुछ लम्हे गिरे थे
सहेज लिया नज़ाकत से उन्हें
एक रेशमी कढ़ाई के रूमाल में
बाद मुद्दत के देखा उन्हें
मोगरे के फूल थे महकते हुए

#दुआ

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