मेरे सिरहाने

मेरे सिरहाने तेरी यादों के साये हैं
आज फ़िर तेरी रहगुज़र में आए हैं
वो दूर सुनहरी ख्वाबों की बस्ती है
अकीदत से हम उसे बसा आए हैं
दिल की दुनिया है बड़ी संगीन सी
बस तज़ल्ली हिज़ाब में छुपा लाए हैं
कौन है जो रूखे-रोशन नुमायां करता है
ख़ाक को मेहरे - ताबां कर लाए हैं
एक नूर सा छाया है चारों तरफ़
मुझे लगा वो बेनकाब आए हैं
रक्स आफ़ताब का है प्यारा बहुत
हम उसे जलता हुआ छोड़ आए हैं
आफ़ियत मेरी अब उनसे पूछिए
वो अब मेरे मालिक बन आए हैं

#दुआ

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