एजिंदगी

ज़िंदगी बहुत हुई तेरी लुका छिपी , अब आगे बढ़ । तंग आ चुकी मैं तेरे नखरो से

जीने के लिए बहुत समझौते किए हैं , बस अब सुकून चाहिए , थोड़ा आराम चाहिए

किसी को सफाई ना देनी पड़े , कुछ समझाना ना पड़े , बस आँखें बंद कर यूँ ही बैठी रहूँ

कुछ ना बोलूँ , कुछ ना कहूँ , कुछ ना सोचूँ , निर्विकार हो बस जी लूँ थोड़ा सा

बहुत ज़्यादा तो नहीं माँग लिया ना तुझसे  ए ज़िंदगी ।

चल अब मान भी जा एक अच्छी सहेली की तरह

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