सपने

कुछ अधपके सपने
कुछ महके शब्द
होगी अपनी अंतहीन यात्रा
हम जाकर भी कहीं ना जाएँगे
इन शब्दों में स्मृति बन रह जाएँगें
बहते रहेगें अनादिकाल हवा में
गंध बनकर , छाँव बनकर , धूप बनकर

#दुआ

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