दिल की किताब

दिन है कोरा कागज़ मेरा
प्रेम सुई , हृदय है डोर
कहानियों की लिखकर किताब
ज़िल्द चढ़ाती इस पर रोज़

आँसू से गीले पन्ने 
कुछ लिखा हुआ कुछ धुला हुआ
कोई पाठक ऐसा ना मिला
जो पढ़ता इसे इक रोज़

#दुआ

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