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किंचित

राजहंस के श्वेत पंखों से कुछ सृजन कर जाऊँगी कभी कण्व , कभी व्यास सा किंचित कुछ लिख पाऊँगी #अर्चना अग्रवाल 

जब भी देखूँ तेरा चेहरा नज़र आए किताब खुले तो सफ़ा कहाँ नज़र आए तेरी बातें , तेरी यादें और आँखेंतेरी अल्फ़ाज़ में तेरी हँसी नज़र आए दिल लगा के मेरा हाल बुरा हो गया अब आईने में तेरी सूरत नज़र आए

रात गये

आगोश में वो आए तो साँसे थम गईं एक चाँद मचल गया एक रात बहक गई #दुआ #रातगये

क्या कहूँ

आँखों की कोरो से टपकी जो बूंदें उन्हें अश्क ना कहूँ तो क्या कहूँ तेरी याद में कुछ लिखा और मिटाया उसे शायरी ना कहूँ तो क्या कहूँ ख्वाब में देखा तुझे जी भर कर उसे झूठ ना कहूँ तो क्या कहूँ #दुआ

रात खामोश है

रात खामोश है मेरे दिल की तरह तेरी याद महके महुआ की तरह ज़िस्म की बात सभी करते हैं  रूह को समझो फरिश्ते की तरह  मैंने चाँद से तेरा पता पूछा था  सर झुकाया उसने इक मुज़रिम की तरह सिमट आई ज़िंदगी इक लम्हे में  जी लिया तुझको अब खुशबू की तरह  चराग जलते हैं इंतिज़ार में तेरे  आँख भर आई अब दरिया की तरह  एक अहसास है भीगा - भीगा सा  पहली बारिश की सौंधी महक की तरह  पथराई आँखों में है एक अक्स ठहरा सा  चाँद पर बैठी अम्मा की तरह #दुआ

चले आओ

जीने की तलब लगी है साँस बन चले आओ  इन सर्द रातों की कसम  अलाव बन चले आओ  अबके सावन ना बरसी बारिश मान लो कहना अब्र बन चले आओ  अब ना कभी झगड़ेंगें तुमसे  प्रीत मनुहार बन चले आओ  माना कि भूलभुलैया हैं दिल्ली की गलियाँ गूगल मैप से पूछ चले आओ  मन्नतों के धागों में बाँधा है तुम्हें  अब कुबूलनामा बन चले आओ #दुआ

लफ़ज़

लफ़ज़ो की ज़रूरत ही नही है तुम मुस्कुरा देना मैं पलकें झुका लूँगी

तेरी सूरत

जब भी देखूँ तेरा चेहरा नज़र आए किताब खुले तो सफ़ा कहाँ नज़र आए तेरी बातें , तेरी यादें और आँखें तेरी अल्फ़ाज़ में तेरी हँसी नज़र आए दिल लगा के मेरा हाल बुरा हो गया अब आईने में तेरी सूरत नज़र आए