जब भी देखूँ तेरा चेहरा नज़र आए
किताब खुले तो सफ़ा कहाँ नज़र आए
तेरी बातें , तेरी यादें और आँखें तेरी
अल्फ़ाज़ में तेरी हँसी नज़र आए
दिल लगा के मेरा हाल बुरा हो गया
अब आईने में तेरी सूरत नज़र आए
सागर सम इस सृष्टि में होता लहरों का नर्त्तन हैं मदिर , अत्यंत सुरभिमय ह्वदयंगम भाव आवर्त्तन मुखरित हैं गीत संगीत यहाँ ,नुपूर कंकण बज रहे प्रखर पावस में अगणित ज्योर्तिकण च...
चेहरों पर चेहरे सजाए हुए हैं सब ही मुखौटे लगाए हुए हैं होठों पे बैठे खामोशी के पहरे दिल में दर्द के सागर गहरे कर जाती त्रुटि मैं पढ़ने में उनको हो जाती कुंठित मेरी चेतना समय...
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