सागर सम इस सृष्टि में होता लहरों का नर्त्तन हैं मदिर , अत्यंत सुरभिमय ह्वदयंगम भाव आवर्त्तन मुखरित हैं गीत संगीत यहाँ ,नुपूर कंकण बज रहे प्रखर पावस में अगणित ज्योर्तिकण च...
चाँद की ज़मीं पर खेती करनी है बोने हैं कुछ सपने , कुछ भाव सलोने अश्रु जल से सिंचाई कर रोज़ निगहबानी करनी है चाँद की ज़मीं पर खेती करनी है ... जो मिल ना सका इस धरती पर उसकी फसल उगान...
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