कुछ दिल की


कौन कहता है चेहरे से इश्क होता है
हमने ऐ बेखबर साये से मोहब्बत की है 

विदा देते हैं भीगी नज़रों के कंवल
याद की झील में उगती है हर इक शाम

गुज़रे पल छिन की यादों के उजाले छलके
कौन देता है ज़हन में दस्तक हल्के -हल्के

खामोशी जो बोलती है कहने दो
रूह से टपके कतरा - शबनम बहने दो 
तसव्वुर में हँसता है अक्स सनम का
नूर की बूँद को मुकम्मल होने दो 

#दुआ

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