याद है तुम्हें ? अक्सर रात को दो बजे तुम्हारी चाय की तलब । किटकिटाती सर्दी हो या पसीने से भरी गर्मी , तुम्हें चाहिए कड़क ब्राऊन चाय । सच बड़ी कोफ़्त होती थी कभी-कभी । पर कभी-कभी ...
वक्त बनाता है सिकंदर वक्त बनाता फकीर है वक्त से बड़ी न कोई भी शमशीर है बैठा देता ये अर्श पर , ला देता है फर्श पर इसे कम न समझना नाम इसका ही तकदीर है कितने ही स्वयंभू आए , कितने ही ...
हर सूँ वही नज़र आता है जब प्यार किसी से होता है आग सी लग जाती है सीने में जब प्यार किसी से होता है कारज़ारे उलफ़्त में इक तमाशा सा होता रहता है दिल अपना और फिक्र गैर की जब प्यार ...
आज सोचूँ तो कल हो जाऊँ तुझे लिखूँ तो तुम बन जाऊँ प्यार करूँ तो राधा बन जाऊँ नाचूँ तो मीरा बन जाऊँ रोऊँ तो समन्दर बन जाऊँ हठ करूँ तो पर्वत बन जाऊँ बह चलूँ तो गंगा बन जाऊँ क्या कर...