वक्त ..
वक्त बनाता है सिकंदर वक्त बनाता फकीर है
वक्त से बड़ी न कोई भी शमशीर है
बैठा देता ये अर्श पर , ला देता है फर्श पर
इसे कम न समझना नाम इसका ही तकदीर है
कितने ही स्वयंभू आए , कितने ही शासक चले गए
वक्त के क्रूर हाथों से मान मर्दन किए गए
जो कहते थे हम अमर हैं , जीत ली है ये दुनिया
वक्त ही लाया था उनको , वक्त ही उनको ले गया
अपनी सामर्थ्य की पहचान वक्त सबको दे गया
वक्त से फसलें बनें और वक्त से पतझड़ बने
वक्त ही होता है वो जब छाते हैं बादल घने
है अज़ीब दास्ताँ वक्त की हम क्या कहें
वक्त ही करता है सृष्टि , वक्त प्रलय काल है
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