तुम जो मुस्कुराओ तो कोई बात बने ये जो बर्फ सी जमी है पिघले तो कोई बात बने चाँद तो रोज़ नज़र आता है ज़मी से वो आगोश में आए तो कोई बात बने तेरी अदा , वफा, रंगत बड़ी सुहानी है हमको कत...
लेखन वास्तव में दुरूह कार्य है , जब किसी पात्र की हत्या करनी होती है ना तो कैसा - कैसा उमड़ता घुमड़ता मन में कि क्या बताएँ बस । कई बार रोई हूँ मैं किसी को मारकर अपनी कहानी में Iए...
मैं जवाब पूछूँ तुम सवाल बन जाना मेरे हर अहसास की किताब बन जाना माना कि दुनिया में बहुत कम हैं खुशियाँ कायनात में मेरी आखिरी तलाश बन जाना आलम - ए - मस्ती में हम रोज़ लेते हैं तेर...
गर्मी की दोपहर है सूनी सी , अलसायी सी दिवस काल में छोटे से टुकड़े की भाँति समायी सी निस्तब्ध खड़ी मैं इस मोड़ पर किंचित सकुचायी सी आँख नींद से मुंदी जाती , बीच-बीच में जग जाती ...