तो कोई बात बने

तुम जो मुस्कुराओ तो कोई बात बने
ये जो बर्फ सी जमी है पिघले तो कोई बात बने
चाँद तो रोज़ नज़र आता है ज़मी से
वो आगोश में आए तो कोई बात बने
तेरी अदा , वफा, रंगत बड़ी सुहानी है
हमको कतरा भी मिले तो कोई बात बने
ज़िंदगी है कोई फटे दामन जैसी
हम जो रफ़ू करें तो कोई बात बने
रोज़ आ जाते हैं अश्क इन आँखों में
बिछड़ा मीत जो मिले तो कोई बात बने
बारिश बरस के बरसा रही हैं खुशियाँ
इन खुशियों में हम नहाएँ तो कोई बात बने

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