कुछ पल

ज़िंदगी से कुछ पल चुरा लिए
तुम संग थोड़ा गा ,मुस्का लिए
जाने कौन , कहाँ , कब किस मोड़ पर मिल जाए
बने मन का साथी और अंतस पर छा जाए
यूँ ही नत नयनों से छुप-छुप कर उन्हें देखा करूं
ना बोलूँ अधरों से बस कविता लिखा करूं

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