अर्चना


काँच सा कच्चा मन हरा हो गया 
फागुनी फिर सफर हो गया 
ढोलकें , शंख , होरी , ऋचाएँ 
मन गीतों का घर हो गया 
हृदय स्पंदित , अप्रतिम प्रेम
कल्पना में मिलन हो गया 
पूज्य हो तुम ,आराध्य हो तुम
'अर्चना ' हर प्रहर हो गया .. 
#दुआ

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