पापा

 थोड़े नारियल से थे पापा
बाहर से कठोर अंदर से मलाई थे पापा
बचपन में परी मुझे बुलाते थे
दाँत मेरे गिन सोलह बताते थे 
जब बंगलौर से दिल्ली ना जा पाई थी
चिठ्टी लिख डाक से भिजवाते थे
अंतिम समय मिल ना पाई तो क्या 
बाद मौत के मिलने आए थे पापा 

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