इकरार

वो जो तुम कहती हो शरमा के नहीं - नहीं 
बुद्धू वही तो प्यार का इकरार है
कानों पे झूलती लट को घुमा 
मुस्कुराती हो वही तो इज़हार है 
मैं कत्थई आँखों में झाँकता हूँ जब भी
सामने पाता वफ़ा का इसरार है 
देखो , मानो या ना मानो पर सच है यह
 इस आँख मिचौली पर दिल निसार है 

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