तुम कहते तो ...
तुम कहते तो
हार जाती ख़ुद को
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
जुबाँ ना सही
आँखों से बयाँ करती
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
हाल बेहाल तो तुम्हारा भी है
संवार देती सब कुछ
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
बहक उठते कदम
महक उठता हरसिंगार आँगन में
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
ताल में , तलैया में
नदी की कलकल धारा में
बह जाते संग - संग
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
मदिर - मदिर नशा
तारी कर देता हमें हर रोज़
मगर ज़रूरी यह
तुम कहते तो ...
#दुआ
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