ज़रूरी तो नहीं

जिसे तुम चाहो वो भी तुम्हें चाहे
ज़रूरी तो नहीं 
चाँद तुम्हारा ही रहे हमेशा 
ज़रूरी तो नहीं 
रूह भटके , मुकाम मिल जाए 
ज़रूरी तो नहीं 
तिश्नगी लब पे हो , दरिया पास हो
ज़रूरी तो नहीं 
एक उम्मीद है अब भी बुझे से मन में
तुम रूबरू आ जाओ 
ज़रूरी तो नहीं 
#दुआ

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