पता ना था

घाव अच्छे हैं अब लगते, दर्द होता है थोड़ा सा

ये दुआएँ तुम्हारी हैं , मुझे पहले पता ना था


तुम दिल के पास हो इतने ,धड़कते हो सीने में

मैं ख़ुद को भूल जाती हूँ , मुझे पहले पता ना था


ज़िस्म की बंदिशें भूली , भटकती हूँ रूह बनकर

ये अहसास की खुशबू , मुझे पहले पता ना था


चाँद नमकीन होता है , चखा था कल रात मैंने

ज़बाँ का ये ज़ायका , मुझे पहले पता ना था


आँखों - आँखों में कह देते हो हज़ारों बातें

गुफ़्तगू का ये सिलसिला , मुझे पहले पता ना था


#अर्चना अग्रवाल 


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