तुम साथ होते तो क्या होता

जी तो रहे तुम बिन 
तुम साथ होते तो क्या होता 
गुलमोहर दहकता और तरह
आँख में पानी ना होता 
धानी चुनर उड़कर 
लिपट जाती तुमसे 
बारिश में मेरा मन 
प्यासा ना होता 
किताबों के सफ़े 
फड़फड़ा कर रह जाते हैं 
किस्सों में भरा गम ना होता
तुम साथ होते तो क्या होता 
गुलमोहर दहकता और तरह 
आँख में पानी ना होता

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