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कुछ दिल की

कौन कहता है चेहरे से इश्क होता है हमने ऐ बेखबर साये से मोहब्बत की है  विदा देते हैं भीगी नज़रों के कंवल याद की झील में उगती है हर इक शाम गुज़रे पल छिन की यादों के उजाले छलके कौन देता है ज़हन में दस्तक हल्के -हल्के खामोशी जो बोलती है कहने दो रूह से टपके कतरा - शबनम बहने दो  तसव्वुर में हँसता है अक्स सनम का नूर की बूँद को मुकम्मल होने दो  #दुआ

पता ना था

घाव अच्छे हैं अब लगते, दर्द होता है थोड़ा सा ये दुआएँ तुम्हारी हैं , मुझे पहले पता ना था तुम दिल के पास हो इतने ,धड़कते हो सीने में मैं ख़ुद को भूल जाती हूँ , मुझे पहले पता ना था ज़िस्म की बंदिशें भूली , भटकती हूँ रूह बनकर ये अहसास की खुशबू , मुझे पहले पता ना था चाँद नमकीन होता है , चखा था कल रात मैंने ज़बाँ का ये ज़ायका , मुझे पहले पता ना था आँखों - आँखों में कह देते हो हज़ारों बातें गुफ़्तगू का ये सिलसिला , मुझे पहले पता ना था #अर्चना अग्रवाल 

तुम साथ होते तो क्या होता

जी तो रहे तुम बिन  तुम साथ होते तो क्या होता  गुलमोहर दहकता और तरह आँख में पानी ना होता  धानी चुनर उड़कर  लिपट जाती तुमसे  बारिश में मेरा मन  प्यासा ना होता  किताबों के सफ़े  फड़फड़ा कर रह जाते हैं  किस्सों में भरा गम ना होता तुम साथ होते तो क्या होता  गुलमोहर दहकता और तरह  आँख में पानी ना होता