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कुछ दिल से

एक बार फिर से ख्वाहिश हुई है जीने की , वज़ह भी पता नहीं , पर तलब सी लगी है जीने की । कुछ है जो रह-रह के घुमड़ता है दिल में ,आकार नहीं दे पाती , लिख नहीं पाती पर कुछ तो है जो धुंध की तरह सी...

आशियाना

एक आशियाना ऐसा बनाना है सूरज को कंदील, चाँद द्वार पर सजाना है प्रेम , त्याग , समर्पण के फूल खिलाने हैं बगिया में रोज़ नेह का पानी देते जाना है दीवारों पर तेरी - मेरी तस्वीर लगान...

चेहरा

चेहरों पर चेहरे सजाए हुए हैं सब ही मुखौटे लगाए हुए हैं होठों पे बैठे खामोशी के पहरे दिल में दर्द के सागर गहरे कर जाती त्रुटि मैं पढ़ने में उनको हो जाती कुंठित मेरी चेतना समय...

गुनाह

जो रफ़ाक़त की अहद हमसे किया करते हैं वक़्त बदले तो वही पल में दग़ा करते हैं उनसे नज़रों का मिलाना ,हया को खो देना कुछ गुनाह कितने हसीन हुआ करते हैं उन्हें महसूस किया तसव्वुर ...

ओस

ओस की बूँद हूँ मुझे कुछ पल जीने दो ना बाँधो बंधन में यूँ मुक्त ही रहने दो दूर से देखोगे तो मुझे हीरे की कनी सा पाओगे पास आओगे तो हाथ में लेने को मचल जाओगे ना करना स्पर्श मुझे अम...

तो कोई बात बने

तुम जो मुस्कुराओ तो कोई बात बने ये जो बर्फ सी जमी है पिघले तो कोई बात बने चाँद तो रोज़ नज़र आता है ज़मी से वो आगोश में आए तो कोई बात बने तेरी अदा , वफा, रंगत बड़ी सुहानी है हमको कत...

कुछ मन की

लेखन वास्तव में दुरूह कार्य है , जब किसी पात्र की हत्या करनी होती है ना तो कैसा - कैसा उमड़ता घुमड़ता मन में कि क्या बताएँ बस । कई बार रोई हूँ मैं किसी को मारकर अपनी कहानी में  Iए...