कुर्सी

हे कुर्सी माता
कैसे करूँ मैं तेरी श्लाघा
तुम ही जग को नचाती हो
स्वप्न में नित भरमाती हो
छ्ल, प्रपंच सब तुम्हरे कारण
दूध मलाई दे जाती हो
ठाठ - बाठ सब नौकर-चाकर
संग अपने लाती हो
निशिदिन करूँ आरती मैया
दे दो अपनी कृपा की छैयाँ
#दुआ

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