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Showing posts from December, 2017

कुछ कहना है

क्यूँ हम हमेशा दायरों में बंध कर बाते करते हैं कभी धर्म का दायरा कभी जाति का , कभी वर्ग विशेष का तो कभी प्रांतीयता का , ये सब टैग ज़रूरी हैं क्या हमारे साथ ? क्यूँ हम अहम् को छोड़ ...

कर्मवीर

राह है दूभर विकल है तन , मन पुलकित नहीं है वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नहीं है किंतु , परंतु , आशा , निराशा सब हैं मन में आते पर भवितव्यता के बस में हम सब जीते जाते तिमिरावृत...

लिख पाऊँगी

मेरी लेखनी मेरा काव्य सृजन काव्य के नव रूपों के पुंडरीक भाव नदी से निकसते असंख्य भास्कर , अगणित शशि प्रस्फुटित होता नाद सौन्दर्य स्नेह का आँचल सहलाता मुझे तपोवन की पवित्...

दिल की किताब

दिन है कोरा कागज़ मेरा प्रेम सुई , हृदय है डोर कहानियों की लिखकर किताब ज़िल्द चढ़ाती इस पर रोज़ आँसू से गीले पन्ने  कुछ लिखा हुआ कुछ धुला हुआ कोई पाठक ऐसा ना मिला जो पढ़ता इस...

सपने

कुछ अधपके सपने कुछ महके शब्द होगी अपनी अंतहीन यात्रा हम जाकर भी कहीं ना जाएँगे इन शब्दों में स्मृति बन रह जाएँगें बहते रहेगें अनादिकाल हवा में गंध बनकर , छाँव बनकर , धूप बनक...

दिसम्बर की धूप

बड़ी है नशीली दिसम्बर की धूप कुछ है लजीली दिसम्बर की धूप तेरी छत से मेरी छत तक छनकर छितराती दिसम्बर की धूप छूना चाहूँ पर छू ना पाऊँ बाँधू तो बाँध ना पाऊँ चंदन सी महकती दिसम्...

तुम और तुम

हृदय जलधि है अथाह प्रस्फुटित होती मेरी चाह मेरे हर्ष के कूल हो तुम नयन कोर तक रहना तुम विश्व उद्‌धि के हृदय अधीर को अपने अहं से भले ही चीर दो मेरी स्मरण शक्ति के सार तुम इसमे...

बड़ी बात है

पत्थर मारेंगें वो ये पता है हमें अपने सिर को बचाना बड़ी बात है देश का मेरे हिस्सा है वो लेकिन खैरियत से गुज़रना बड़ी बात है छुक - छुक रेल हमें लगती है भली ज़िंदा बचकर आना बड़ी ...

सृष्टि रहस्य

सागर सम इस सृष्टि में होता लहरों का नर्त्तन हैं मदिर , अत्यंत सुरभिमय ह्वदयंगम भाव आवर्त्तन मुखरित हैं गीत संगीत यहाँ ,नुपूर कंकण बज रहे प्रखर पावस में अगणित ज्योर्तिकण च...

स्मृति

अतिरंजित थी स्मृति उसकी कुछ मधुरा कुछ त्वरा सी मन मेरा उसमें तल्लीन हुआ प्रियदर्शन को सदा  लोभी जो उल्लास था बने ज्वाला ग्रीवा में पिय की माला खटकती हिय में विषमता तिस पर ...

एजिंदगी

ज़िंदगी बहुत हुई तेरी लुका छिपी , अब आगे बढ़ । तंग आ चुकी मैं तेरे नखरो से जीने के लिए बहुत समझौते किए हैं , बस अब सुकून चाहिए , थोड़ा आराम चाहिए किसी को सफाई ना देनी पड़े , कुछ समझा...